मिशन शक्ति (Mission Shakti) क्या है? – Essays For UPSC

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दोस्तों आज Sarkari Naukri Help की टीम सिविल सेवा की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों के लिए Essays on Current Topics से सम्बंधित महत्वपूर्ण टापिक मिशन शक्ति (Mission Shakti)  क्या है?  जो कि Essay for UPSC के आधार पर महत्वपूर्ण है

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Essays on Current Topics निबंध आपको अपने विचारों को एक ऐसे तरीके से सामने रखने का अवसर देता है जिसमें आपके ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त शब्द और समय नहीं दिया जाता है। यह आपके ज्ञान की गहराई और चौड़ाई की जांच करने के लिए कहा जाता है। और जब हम ज्ञान कहते हैं, तो इसका मतलब हमारी पारंपरिक समझ नहीं है। परीक्षा से पहले विषय हमारे लिए अज्ञात हैं और हमसे अपेक्षा की जाती है कि हम जो कुछ भी पूछ रहे हैं उसका तार्किक और बुद्धिमान बनाना सीखें।

मिशन शक्ति क्या है? –  एन्टी सैटेलाईट हथियार

भारत ने यह एक बहुत बड़ा कदम उठा कर यह साबित कर दिया है कि उसके पास अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को सुरक्षित रखने की क्षमता है और यह भी दिखा दिया कि अगर कोई उपग्रह उसके लिए खतरा पैदा करता है तो भारत उसे भी मार गिरा सकता है।

भारत ने आज एक काईनेटिक हथियार का इस्तेंमाल कर एक लो अर्थ आर्बिट सैटेलाईट को मार गिराया जिसका अर्थ हुआ कि भारत ने अपनी अंतरिक्ष संपदा की सुरक्षा करने मे सक्षम होना साबित कर दिखाया।

अब तक केवल अमेरिका,रुस और चीन ऐसा कर सकते थे और भारत अब ऐसा चौथा देश बन गया है  जिसक पास एटी-सैटेलाईट हथियार है।एंटी सैटेलाईट विपन्स का उपयोगी उपग्रहों को नष्ट करने या निष्क्रिय करने के लिए करते है।ऐसे कई देश है जिनके पास ऐसी क्षमता है लेकिन भारत सहित केवल चार देशो ने अपनी ASAT क्षमताओं को साबित किया है।अमेरिका ने पहली बार साल 1958,रुस ने (Union of Soviet Socialist Republic – USSR) ने 1964 और चीन ने 2007 में ASAT का परीक्षण किया साल 2015 में रुस ने अपनी PL-19 Nudol मिसाईल का परीक्षण किया और अन्य परीक्षणों के साथ पालन किया।डीआरडीओ ने फरवरी 2010 में घोषणा किया कि भारत अंतरिक्ष में दूश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने के लिए एक हथियार बनाने के लिए आवश्यक तकनिकी विकसित कर रहा है।

साल 2007 में चीन द्वारा परीक्षण करने के बाद कई देशों ने इस कदम की आलोचना की थी और अंतरिक्ष में सैन्यीकरण में संलग्न होने के गंभीर परीणामों का सामना करना पड़ सकता है।चीन यह कहते हुए आंशकाओं को दूर करने की कोशिश की थी कि वह बाहरी अंतरिछ में किसी भी तरह की हथियारो की दौड़ में भाग नही लेगा।एसैट मिसाईलो ने भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम में नई उपलब्धि हासिल की है।

300 किमी की ऊँचाई:

भारत के पास हालिया वक्त तक 48 उपग्रह थे जो कक्षा में चक्कर काट कर रहै थे और इंडो-पैसफिक क्षेत्र में उपग्रहों को सबसे बड़ा जखीरा है।जिसकी सुरक्षा किया जाना बेहद जरुरी है।आज के मिशन शक्ति ने दिखा दिया कि भारत 300 किमी तक उंचाई पर भी किसी सक्रिय सैटेलाईट को मार गिराने की क्षमता रखता है।

भले ही प्रधानमंत्री ने नही की है लेकिन पूरी संभावना है यह माइक्रो सेट आर था जिसे 277 किमी की ऊचाई पर PSLV के जरिये 24 जनवरी 2019 को लान्च कियागया था इस सैटेलाईट की वजन 740 किग्रा था।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि भारत के पास एंटी सैटेलाईट टेस्ट करने की क्षमता कम से कम पिछले 10 सालों से मौजूद है।

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मिशन शक्ति क्यों इतना महत्वपूर्ण है :

इतनी उचाई पर किसी सैटेलाईट को मार गिराना आसान काम नही है क्योकि सैटेलाइट बेहद तेज गति से यानि सैकड़ों किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा होता है और इतने छोटे लक्ष्य को सटीकता से भेदना बड़ी चुनौती होती है यह बंदूक से निकली गोली को 300 किमी की दूरी दूसरी गोली को भेदना केजैसा होता है।

मिशन शक्ति क्यो दूसरे देशो के लिए चिंता का कारण है

देशों की चिंता होतीहै कि इस तरह के परीक्षणों से अंतरिक्ष में मलबा जमा हो जायेगा और अन्य सैटलाइटों के लिए दिक्कत पैदा करेगा। ISRO के पूर्व अध्यक्ष डाँ जी माधवन नायर कहा कि 300 किमी तक की उंचाई पर भारत द्वारी किये गये इस टेस्ट से अंतरिक्ष में मलबा जमा होने की संभावना नही है।

वर्ष 2012 में जब भारत ने ब्हीलर आईलैण्ड से अग्नि-5 की सफल परीक्षण किया था देश के पास सैटेलाईट को नष्ट करने की क्षमता आ गई थी अग्नि-5 दरअसल 5000 किमी रेंज वाली इंटर कांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाईल है और DRDO  के तत्कालीन प्रमुख डां वीके सारस्वत ने पुष्टि की थी कि इसे सैटेलाइट नष्ट करने या लान्च करने दोनो ही कामो के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैजो की आपात स्थिति में बेहद तेज गति से चलते उपग्रह को निशाना बनाकर उन्हे नष्ट कर सकता है।

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1 Comment
  1. Raghu says

    Hme upsc nda ki jaankari

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