Meaning of Budget – बजट क्या है? इसका महत्व और प्रक्रिया

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What is Budget and Its Importance | Types of Budget

सरकार द्वारा हर साल बजट क्यों बनाया जाता है – Objectives of Budget? सरकार हर साल बजट बनाकर दो काम करती है

1.अगले वित्तवर्ष में देश के विभिन्‍न क्षेत्रों (जैसे- उद्योग, विनिर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि) में किए जाने वाले विभिन्‍न प्रकार के विकास कार्यों में होने वाले खर्चों का अनुमान लगाती है।

2. अगले वित्तवर्ष के लिए अनुमानित खर्चों को पूरा करने के लिए धन (Funds) की व्‍यवस्‍था करने के लिए सम्‍यक उपाय (जैसे- कुछ चीजों पर कुछ खास तरह के नए Tax लगाने या बढ़ाने अथवा किसी वस्तु या सेवा पर पहले से दी जा रही सब्सिडी (Subsidy) को कम या खत्‍म करना आदि) करती है।

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केंद्र सरकार हर साल पेश करती है आम बजट – Central Government Presents General Budget

केंद्र सरकार, यानी भारत सरकार, हर वित्तीय वर्ष (Financial Year) के पहले आम बजट (general budget) पेश करती है। 2017 के पहले, यह फरवरी के अंत में पेश होता रहा है। लेकिन वर्ष 2017 से यह 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा है। अब चूंकि यह केंद्र सरकार का बजट होता है, इसलिए इसमें केंद्र सरकार की कुल प्राप्तियों (receipts) और कुल खर्चों (expenses) का लेखा-जोखा (estimation) होता है।

जब कभी हम “बजट” शब्द सुनते हैं तो हमें तुरन्त सरकार द्वारा प्रतिवर्ष पेश किए जाने वाले बजट की याद आती है| इस बजट के माध्यम से हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकार ने अगले वित्तवर्ष के लिए किन चीजों पर कर (Tax) बढ़ाकर उनके मूल्य में वृद्धि कर दी है और किन चीजों पर सब्सिडी (Subsidy) के माध्यम से अथवा किसी अन्य तरीके से मूल्य में कुछ कमी करते हुए आम लोगों को राहत दी है| लेकिन क्या आपको पता है कि बजट का अर्थ क्या होता है और यह कितने तरह का होता है? इस लेख में हम बजट की परिभाषा और उसके वर्गीकरण का विवरण दे रहे हैं, जिससे बजट के संबंध में आपकी समझ और भी विकसित होगी|

“बजट” शब्द अंग्रेजी के शब्द “bowgette” से ली गई है जिसकी उत्पत्ति फ्रेंच शब्द “bougette” से हुई है| “bougette” शब्द भी “Bouge” से बना है जिसका अर्थ चमड़े का बैग होता है| साधारण शब्दों में कहें तो बजट एक निश्चित अवधि के लिए संभावित आय और खर्च की योजना है| अर्थशास्त्र की भाषा में बजट राजस्व और व्यय की एक सुनियोजित सूची है या इसे हम बचत और खर्च की योजना भी कह सकते हैं| सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics) में बजट एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसके तहत वस्तुओं के उपयोग और उसके व्यापार का वर्णन किया जाता है|

यानी सरल शब्‍दों में कहें तो सरकार ये निश्चित करती है कि उसे अगले वर्ष देश के विकास से संबंधित किन चीजों पर प्राथमिकता के साथ खर्च करना है और उन खर्चों के लिए धन की व्‍यवस्‍था कैसे करनी है। आय (Income) व व्‍यय (Expenditure) के इसी ब्‍यौरे का नाम बजट (Budget) है और प्रत्‍येक बजट एक निश्चित अवधि के लिए बनाया जाता है।

  • भारत में बजट बनाने में किस तरह की गोपनीयता बरती जाती है

बजट में होता है टैक्सों का निर्धारण -Review of Income Tax Rate

किसी भी सरकार को आमदनी मुख्य रूप से करों (Taxes) के माध्यम से होती है। ये Taxes सरकार दो तरीकों से हासिल करती है-1. प्रत्यक्ष कर (Direct taxes) और 2. अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes)। प्रत्यक्ष कर,  वे होते हैं, जिन्हें सरकार सीधे आपकी कमाई से काट लेती है या हासिल कर लेती है। जैसे Income Tax, Corporate Tax, TDS वगैरह। अप्रत्यक्ष कर वे होते हैं,​ जिन्हें सरकार आपके खर्चों के माध्यम से वसूलती है। उदाहरण के लिए, वस्तु एवं सेवा कर (Goods And Services-GST। करों से जो संभावित आमदनी होती है, उसी के हिसाब से साल भर के खर्चों का खाका तैयार किया जाता है।

Types of Budget (बजट के प्रकार)

बजट मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं –

1. पारम्परिक या आम बजट (Aam Budget): वर्तमान समय के “आम बजट” का प्रारंभिक स्वरूप “पारम्परिक बजट (Traditional Budget) कहलाता है| आम बजट का मुख्य उद्देश्य “विधयिका” और “कार्यपालिका” पर “वित्तीय नियंत्रण”स्थापित करना है|

इस बजट में सरकार की आय और व्यय का लेखा-जोखा होता है| इस बजट में सरकार अगले वित्त वर्ष में किस क्षेत्र में कितना धन खर्च करेगी, उसका उल्लेख तो करती है लेकिन इस खर्च से क्या-क्या परिणाम होंगे उनका ब्यौरा नहीं दिया जाता है|

अतः इस प्रकार के बजट का उद्देश्य सरकारी खर्चों पर नियंत्रण करना तथा विकास कार्यों को लागू करना था न कि तीव्र गति से विकास करना था| अतः पारम्परिक बजट की अवधारणा स्वतंत्र भारत की समस्याओं को सुलझाने तथा विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रही| परिणामस्वरूप भारत में “निष्पादन बजट (Performance Budget)” की आवश्यकता और महत्व को स्वीकार किया गया और इसे पारम्परिक बजट के “पूरक” के रूप में पेश किया जाता है|

2. निष्पादन बजट (Performance Budget): किसी कार्य के परिणामों को आधार मानकर बनाये जाने वाले बजट को “निष्पादन बजट (Performance Budget)” कहते हैं| विश्व में सर्वप्रथम “निष्पादन बजट” की शुरूआत संयुक्त राज्य अमेरिकामें हुई थी|

अमेरिका में 1949 में प्रशासनिक सुधारों के लिए “हूपर आयोग” का गठन किया गया था| इसी आयोग की सिफारिश के आधार पर अमेरिका में “निष्पादन बजट” की शुरूआत हुई थी| “निष्पादन बजट” में सरकार जनता की भलाई के लिए क्या कर रही है? कितना कर रही है? और किस कीमत पर कर रही है? जैसी सभी बातों को शामिल किया जाता है| भारत में “निष्पादन बजट” को उपलब्धि बजट या कार्यपूर्ति बजट भी कहा जाता है|

3. शून्य आधारित बजट (Zero Based Budget): भारत में इस बजट को अपनाने के दो प्रमुख कारण है:

  1. देश के बजट में लगातार होने वाला घाटा|
  2. निष्पादन बजट प्रणाली का सफल क्रियान्वयन न हो पाना|
  3. शून्य आधारित बजट में पिछले वित्त वर्षों में किए गए व्ययों पर विचार नहीं किया जाता है और न ही पिछले वित्त वर्षों के व्यय को आगामी वर्षों के लिए उपयोग किया जाता है| बल्कि इस बजट में इस बात पर जोर दिया जाता है कि व्यय किया जाय या नहीं अर्थात व्यय में वृद्धि या कमी के बजाय व्यय किया जाय या नहीं इस पर विचार किया जाता है|
  4. शून्य आधारित बजट में प्रत्येक कार्य का निर्धारण “शून्य आधार” पर किया जाता है अर्थात पुराने व्यय के आधार पर नए व्यय का निर्धारण नहीं किया जाता है बल्कि प्रत्येक कार्य के लिए नए सिरे से नीति-निर्धारण किया जाता है| इस बजट को “सूर्य अस्त बजट (sun set budget)” भी कहा जाता है जिसका अर्थ है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले प्रत्येक विभाग को शून्य आधारित बजट पेश करना पड़ता है जिसमें विभाग के प्रत्येक क्रियाकलाप का लेखा-जोखा रहता है|

4. परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget): भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में विकास से संबंधित योजनाएं, जैसे- मनरेगा, एनआरएचएम, मध्याहन भोजन योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि शुरू होती हैं|

इन योजनाओं में हर वर्ष भारी-भरकम धनराशि खर्च की जाती है| लेकिन ये योजनाएं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कहां तक सफल रहीं इसके मूल्यांकन के लिए हमारे देश में कोई खास पैमाना निर्धारित नहीं है| कई बार योजनाओं के लटके रहने से लागत में कई गुना की बढ़ोतरी हो जाती है|

अतः इन कमियों को दूर करने के लिए 2005 में भारत में पहली बार “परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget)” पेश किया गया था जिसके अंतर्गत आम बजट में आवंटित धनराशि का विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों ने किस प्रकार उपयोग किया उसका ब्यौरा देना आवश्यक था|

परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget) सभी मंत्रालयों और विभागों के कार्य प्रदर्शन के लिए एक मापक का कार्य करता है जिससे सेवा, निर्माण प्रक्रिया, कार्यक्रमों के मूल्यांकन और परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलती है|

5. लैंगिक बजट (Gender Budget): किसी बजट में उन तमाम योजनाओं और कार्यकमों पर किया गया खर्च जिनका संबंध महिला और शिशु कल्याण से होता है, उसका उल्लेख लैंगिक बजट (Gender Budget) माना जाता है| लैंगिक बजट के माध्यम से सरकार महिलाओं के विकास, कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष एक निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रावधान करती है|

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अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट

Interim Budget or Vote on Account for Transition Period

जब सरकार, अपना अगला वित्तीय वर्ष (financial year), पूरा करने की स्थिति में, नहीं होती तो यह अपना पूर्ण बजट (full budget) पेश नहीं करती। इसकी बजाय, वह अल्पकालिक बजट (shorter period) पेश करती है। इस अल्पकालिक बजट (shorter period) के प्रावधान ( provision) तब तक के लिए लागू होते हैं, जबतक कि अगली सरकार, अपना पूर्ण बजट (full budget) पेश नहीं करती। इसे अंतरिम बजट (interim budget) कहते हैं।

  • पूर्ण बजट की तरह, अंतरिम बजट (interim budget) में भी अगले कुछ महीनों के लिए कमाई और खर्चों का estimate होता है।
  • अंतरिम बजट के बाद 6 महीने के अंदर पूर्ण बजट पेश कर दिया जाना चाहिए। इसलिए अंतरिम बजट 6 महीनों से ज्यादा का नहीं होता।
  • सरकार, अंतरिम बजट में, लोगों को लुभाने वाली कल्याणकारी योजनाओं (populist welfare schemes) की घोषणा नहीं कर सकती। चुनाव आयोग का इस संबंध में स्पष्ट निर्देश है।

अतिरिक्त खर्चों के लिए पेश होता है पूरक बजटsupplementary Budget for Additional Expense

कभी-कभी सरकार का बनाया बजट भी बिगड़ जाता है। साल पूरा होने से पहले ही पैसा कम पड़ जाता है या फिर कुछ नए खर्चे निकल आते हैं। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त पैसे की जरूरत होती है। लेकिन संसद की इजाजत के बगैर सरकार एक रुपया भी अतिरिक्त नहीं खर्च कर सकती है। ऐसे में सरकार को पूरक बजट (Supplementary Budget) लाना पड़ता है।

जब सरकार अतिरिक्त खर्च (Additional expense) के लिए वक्त से पहले छोटा बजट पेश करती है तो उसे पूरक बजट या पूरक अनुदान मांग (supplementary grants) कहा जाता है। इस बजट की प्रक्रिया भी कमोबेश आम बजट (General Budget) जैसी ही होती है।

वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक Finance Bill and Appropriation Bill

हर साल जब बजट आता है तो जरूरतों के हिसाब से सरकार टैक्स की दरों (tax rates) में कुछ ना कुछ बदलाव करती है। अब इन बदलावों को लागू करने के लिए कानून में बदलाव करना पड़ता है। लेकिन कानून में बदलाव तभी हो पाता है जब सरकार संसद से विधेयक (bill )पास कराए। और इसीलिए हर साल के बजट को वित्त विधेयक (finance bill) के तौर पर पेश किया जाता है।

वित्त विधेयक में कर ढांचे (tax structure) में बदलाव और दूसरे नियमों में बदलाव दर्ज होते हैं। संसद इन बदलावों को जब पास करती है तभी बजट के नए proposals लागू होते हैं। संसद को 75 दिन के अंदर finance bill पास करना होता है। हालांकि ये पूरी प्रक्रिया उसके काफी पहले ही पूरी हो जाती है। 2017 से सरकार 31 मार्च के पहले वित्त विधेयक को पास करा लेती है। इससे नए वित्त विर्ष नए बजट के प्रस्ताव लागू हो जाते हैं।

सरकार को बजट के सिलसिले में विनियोग विधेयक (appropriation bill) भी लाना पड़ता है। क्योंकि बिना संसद के इजाजत के सरकार, समेकित निधि (Consolidated fund of India) से कुछ भी खर्च नहीं कर सकती है। इसलिए इस पैसे का इस्तेमाल करने के लिए विनियोग विधेयक लाना पड़ता है।

बजट को सिर्फ लोकसभा से पास कराना जरूरी

आमतौर पर हर विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पास कराना होता है उसके बाद हो कोई विधेयक law बन पाता है। लेकिन पैसे-कौड़ी के मामले में इससे छूट दी गई है ताकि लोकसभा और राज्यसभा की अलग राय होने पर देश का system ठप ना हो जाए। अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही टकराव के चलते अमेरिका की सरकार कुछ दिनों के लिए ठप हो गई थी। हमारे यहां इसकी संभावना ही खत्म कर दी गई है।

अगर कोई विधेयक पैसे से जुड़ा होगा यानी money bill होगा तो लोकसभा से पास होने के बाद इसे parliament से पास मान लिया जाएगा। वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक के मामले में भी यही होता है। इन्हे राज्यसभा से पास कराने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि बजट के सभी पहलुओं पर राज्यसभा में बहस उतनी ही जोरदार होती है।

लोकसभा से पास होने के बाद राष्ट्रपति दोनों बिल को अपनी approval देते हैं। उसके बाद एक अप्रैल से नए बजट के प्रस्ताव लागू हो जाते हैं।

Download बजट 2019-20 PDF हिन्दी में By GS World

Download Union Budget 2019-20 Important Highlight PDF

अंतरिम बजट 2019 के महत्वपूर्ण बिंदु

1- 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था और सुखद जीवन के लिए भौतिक एवं सामाजिक अवसंरचना का निर्माण करना।

2- ऐसे डिजिटल भारत का निर्माण करना जहां युवा वर्ग डिजिटल भारत के सृजन में व्यापक स्तर पर स्टार्ट-अप और लाखों रोजगारों का सृजन करते हुए देश को दिशा दे।

3- भारत को प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए इलैक्ट्रिकल वाहनों और नवीकरण ऊर्जा पर विशेष ध्यान देना।

4- आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके ग्रामीण औद्योगीकीकरण विस्तार के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगारों सृजन करना।

5- देशवासियों के लिए सुरक्षित पेयजल के साथ स्वच्छ नदियां एवं लघु सिंचाई तकनीकों को अपनाने के साथ सिंचाई में जल का सदुपयोग करना।

6- सागरमाला कार्यक्रम की कोशिशों में तेजी लाने के साथ भारत के तटीय एवं समुद्री मार्गों के जरिए देश के विकास को सशक्त बनाना।

7- 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना।

8- सर्वाधिक जैविक तरीके से खाद्यान्न उत्पादन एवं खाद्यान्न निर्यात में भारत को आत्मनिर्भर बनाना। साथ ही दुनिया की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए इसका निर्यात करना।

9- 2030 तक स्वस्थ भारत के लिए बेहतर स्वास्थ्य देखभाल एवं व्यापक आरोग्यकर प्रणाली का विकास। इसमें आयुष्मान भारत और महिला सहभागिता भी एक महत्वपूर्ण घटक होगा।

10. भारत को न्यूनतम सरकार, अधिकतम अभिशासन वाले राष्ट्र का स्वरूप देना। इसमें एक चुनी हुई सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले सहकर्मियों और अधिकारियों के अभिशासन को मूर्त रूप दिया जा सकता है।

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