Indian history Notes In Hindi PDF Download-भारतीय इतिहास के परीक्षा उपयोगी तथ्य

UPSC-UPPCS/SSC/Railways हेतु महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्यो की जानकारी|

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सबसे पहले उन सभी छात्रों को SarkariNaukriHelp की तरफ से धन्यवाद जिन्होने Indian History PDF Notes के पहले भाग Slave Dynasty –गुलाम वंश के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक को काफी पसंद किया। आज SarkariNaukriHelp आप सब छात्रों के लिए इतिहास-Indian History Notes For UPSC PDF  की श्रंखला के के इस भाग मे Slave Dynasty -इल्तुतमिश से संबधित कुछ तथ्यो के के बारे में महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्यो की जानकारी पढ़ने को मिलेगी।

वे छात्र जो SSC Graduate Level Exams—CGL,CHSL, CPO Sub-Inspector, Section Officer(Audit), Tax Assiatant (Income Tax & Central Excise), Section,Officer (Commercial Audit),Banks-IBPS/SBI  PO Clerks,UPSSSC (उत्तर प्रदेश अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड), SSC Matric Level Exam,CISF,Railways Group C & D,KVS PRT-TGT-PGT,SSC Data Entry Operator, Intelligence Bureau(IB) तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है।वे भी Indian History in Hindi Notes के Slave Dynasty –गुलाम वंश के तथ्यो को सरलतम रुप मे पढ़कर परीक्षा मे बेहतर अंक प्राप्त कर सकेगें।   

आप इस Slave Dynasty Notes  को नीचे Live भी देख सकते है और  इसे Download करने के लिये Download Indian History Notes PDF Button Press करे.

इल्तुतमिश(1211-36 ई0)

  • यह इल्वरी तुर्क था, पिता ईलम खांन ने बचपन में ही दास के रुप में बेंच दिया था। अंतत: इसे ऐबक ने गोरी की अनुमति से 1 लाख जीतल में दिल्ली में जमालुद्दीन से खरीदा था।
  • ऐबक ने इल्तुतमिश को बदांयू का इक्तादार नियुक्त किया एवं अपनी पुत्री की शादी भी इससे कर दी।
  • इसे दासता से मुक्ति 1205-06 ई0 में ही मिल गयी थी जब गोरी के आदेश पर ऐबक नें जो कि गोरी का दास था, ने दास मुक्ति का प्रपत्र तैयार कराया था।
  • इल्तुतमिश अमीरो द्वारा चुना गया दिल्ली का पहला शासक था कुछ इतिहास कार इसे अपहर्ता भी मानते है। 1211 ई0 में इसनें सल्तनत की राजधानी लाहौर से दिल्ली बनायी।
  • 1215 ई0 में थाणेश्वर के निकट तराईन के मैदान में एल्दूज को पराजित किया और बंदी बनाकर बदायूं भेज दिया। जहां इसकी हत्या कर दी गई। 1217 ई0 में इल्तुतमिश ने कुवाचा को चिनाब नदी के तट पर स्थित मंसूरा के निकट पराजित किया और पंजाब के बाहर खदेड़ दिया।
  • 1221 ई0 में मंगोल आक्रमण का खतरा उत्पन्न हो गया क्योंकि मंगोलो ने ख्वारिज्न राज्य का अंत कर दिया गया।जिससे ख्वारिज्म राजकुमार मागवानी भाग कर भारत आया और पीछा करते हुए चंगेज खाँ भी भारत आया।
  • मांगवर्नी अपने दूत अईनुल मुल्क को साहायता के लिए इल्तुतमिश ने पास भैजा। इसने बहाने से मना कर दिया जिससे मंगोल का खतरा टल गया।
  • 1224ई0 में मांगवर्ती वापस चला गया तथा मंगोल भी वापस चले गये लेकिन पंजाब में रुकने के कारण कुवाचा की शक्ति का ह्रास हो गया।
  • 1228 ई0 में इल्तुतमिश ने कावाचा पर पुन: आक्रमण कर दिया। कुवाचा सिंध नदी पार करते समय उसी में डूब कर मर गया और इल्तुतमिश का सिंध पर अधिकार हो गया।
  • 1226 ई0 में रणथम्मोर एवं 1227 ई0 में मन्दौर के किलों पर अधिकार कर लिया।
  • ऐबक की म्रत्यु के बाद बंगाल स्वतंत्र हो गया तथा अलीमर्दान की म्रत्यु के बाद ख्वाजा हमासुद्दीन नामक सरदार नें गयासुदीन की उपाधि धारण कर कर बंगाल की सत्ता संभाली।
  • बंगाल में दो अभियान के बाद (पहला इल्तुतमिश के द्वारा दूसरा नासिरुद्दीन महमूद द्वारा) 1225 ई0 में नासिरुद्दीन बंगाल का शासक बना। 1229ई0 में बीमारी के कारण इसकी म्रत्यु हो गयी।इसके बाद खिलजी सरकार बल्का ने विद्रोह कर दीया। इल्तुतमिश ने इस विद्रोह को दबाकर मलिक जानी को अपनी अधिनता में बंगाल का शासक बना दिया।
  • 18 फरवरी 1229ई0 में बगदाद के खलीफा अल मुस्तंस्वि विल्राह ने खिलहत(विशेष पोशाक) एवं मान पत्र भेजकर सुल्तान के पद की मान्यता दी। इस प्रकार खलीफा के द्वारा मान्यता प्राप्त पहला सुल्तान इल्तुतमिश हुआ।
  • इसी समय उसने चांदी का टका 175 ग्रेन एवं तांबें का जीतल नामक सिक्कों को जारी किया। टका एवं जीतल का अनुपात 1:48 थे। इसके कुछ सिक्को पर शिव के वाहन नन्दी एवं घुड़सवार अंकित मिलते है।
  • 1231 ई0 में ग्वालियर अभियान किया यहां के शासक वर्म देव या मंगल देव ने इसकी अधिनता स्वीकार कर ली। इस अभियान पर जाते समय अपनी अनुपस्थितिमें शासन संचालन के लिए रजिया को नियुक्त किया। इसने सफलता पुर्वक 6माह तक शासन किया।
  • इसी कारण अभियान से वापस आने के बाद रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। एवं चांदी के टके में अपने साथ साथ रजिया का नाम भी अंकित कराया।
  • 1233-34ई0 में इल्तुतमिश ने मालवा पर अक्रमण कर दिया ।
  • इसी समय दोआब में कन्नौज , बदांयू,बनारस,अवध आदि के विद्रोही सरदारों को अपने अधीन किया। अवध के स्थानीय नेता ने तुर्की सेना को अत्याधिक क्षति पहुचाई।इसकी म्रत्यु के दोआब में शान्ति स्थापित हो सकी।
  • इसका अन्तिम अभियान वामियान के विरुध्द हुआ इसी अभियान के दौरान यह बीमार हुआ और 29 अप्रैल 1236ई0 को सिंध में म्रत्यु हो गय़ी।
  • इल्तुतमिश ने भारत में इक्ता प्रथा प्रारम्भ की जबकि इक्ता प्रथा का जनक मु0गोरी को माना जाता है।
  • इल्तुतमिश ने 40 बड़े इक्तादार नियुक्त किये थे जिन्हें तुर्कान-ए-चहलगामी या चालीस दल कहते थे।
  • इक्ता की परिभाषा निजामुल-मुल्क तूसी की पुस्तक सियासत नामा से ली गयी है।
  • इसने दिल्ली में न्याय व्यवस्था अपनायी एवं काजी का पद बनाया जिस पर पहली नियुक्ति मिनहास-उस-सिराज की हुई। इब्नबतुता ने इसके न्याय व्यवस्था की प्रशंसा करता था।इल्तुतमिश के महल के बाहर दो शेर भी बंने थे जिनके गले में घंटिया बंधी थी।जिन्हें बजाकर कोई भी फरियादी न्याय की मांग सुल्तान से कर सकता था।
  • इल्तुतमिश ने ही वजीर के पद बनाया जिस पर पहली नियुक्ति निजामुल मुल्क जुनैदी की हुई वजीर के कार्यों में सामान्य प्रशासन, सैन्य व्यवस्था एवं राजस्व व्यवस्था आती थी, इसने कुतुबमीनार का कार्य पूरा कराया एवं अपने बड़े पुत्र नसिरुद्दीन का मकबरा सुल्तान गढ़ी के नाम से बनवाया।इसे दिल्ली सल्तनत का पहला मकबरा माना जाता है।
  • बदांयू में हौज-ए-शम्शी नामक तालाब एवं शम्शी ईदगाह बनवाया।दिल्ली में एक मदरसा-ए-नासिरी के नाम से बनवाया एवं शिक्षा की नींव डाली।कुछ समकालीन विवरणों में इसे ‘अल्लाह के इलाकों का रक्षक एवं ईश्वर के सेवको का साहायक कहा जाता है’
  • RP Tripathi के अनुसार ” यह दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक था।” निजामी ने इसका समर्थन किया।
  • हबीबुल्ला के अनुसार ’सल्तनत का रुपरेखा ऐबक ने बनाई एवं इल्तुतमिश इसका पहला वास्तविक शासक हआ। ’

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Download Indian History Notes PDF Slave Dynasty -इल्तुतमिश

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4 Comments
  1. Veronica says

    Sir…Kya aapp vdo ke practice set papers ki book pdf form mein provide kr skte hai……

  2. Priyanka jain says

    Sir mujhe political science and international relations optional subject ke last 10 year ke unsolved ki pdf mil sakti hai kya for hindi medium please help me

  3. Priyanka jain says

    Sir mujhe optional subject political science and international relations ke last 10 ya 5 year ke unsolved pepar ka pdf mil sakta hai kya please help me I really need it alot

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