Indian History GK Notes PDF For Civil Services | SSC | UPPCS

प्रस्तर युग: पुरा पाषाण काल के बारे में परीक्षा उपयोगी तथ्य

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आज SarkariNaukriHelp आप सब छात्रों के लिए Indian History GK Notes PDF For Civil Services- प्रस्तर युग: पुरा पाषाण काल – से सम्बंधित महत्वपूर्ण नोट्स “History GK Notes” शेयर कर रहा है. जो छात्र SSC, Railway RRB (ASM, RRB ALP, Technician Or Group-D) या अन्य Competitive Exams की तैयारी कर रहे उनके ये Stone Age History Notes  का ये भाग  काफी मददगार साबित होगा. आप लूसेंट पब्लिकेशन के द्वारा तैयार की गई इस Indian History pdf  को Download करके अवश्य पढना चाहिए.
जैसा की आप जानते है हम हमेशा SSC CGL, Railway, UPSC, Civil Services तथा अन्य Sarkari Naukri की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए हमेशा Best Indian History Study Material PDF उपलब्ध कराते है और अभी कुछ दिनों में UPSC,UPPCS तथा SSC Exam होने वाले है और Indian History GK Notes PDF For Civil Services में पढना आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होगा.तो आईये जानते है कि प्रस्तर युग में मानव की सभ्यता का विकास कैसे हुआ।
नवीनतम अनुसंधानो और अध्ययन से ज्ञात होता है कि मानव लगभग 30 लाख वर्ष पुराना है. आदिम मानव के जीवाश्म भारत में नहीं मिले है. मानव के प्राचीनतम अस्तित्व का संकेत द्वितीय हिमावर्तन (ग्लेसिएशन) काल के बताए जाने वाले संचयों में मिले पत्थर के औजारों से मिलता है  जिनका काल लगभग 2,40000 ई. पू. रखा गया.
अफ्रीका की अपेक्षा भारत में मानव बाद में बसे. भारत में आदिम मानव द्वारा पत्थर के अनगढ़ और अपरिष्कृत औजारों का इस्तेमाल, औजार सिन्धु, गंगा और यमुना के कछारी मैदानों को छोड सारे देश में पाए गए. शिकार से जीवन यापन करते  थे, खेती  करना और घर बनाना नहीं जानते थे. पुरापाषाण काल मानव द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर के औजारों के स्वरूप तथा जलवायु में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर पूरा पाषाण काल को तीन भागों में विभक्त किया जाता है-
(1)    निम्न पुरापाषाण काल -2,50,000 ई. पू. और 1,00,000 ई. पू. के बीच
(2)    मध्य पुरापाषाण काल – 1,00,000 ई. पू. और 40,000 ई. पू.
(3)    उच्च पुरापाषाण काल -40,000 ई. पू. और 10,000 ई.पू. के बीच.
निम्न पुरापाषाण काल– पुरापाषाण युग के लक्षण हैं कुल्हाड़ी या हस्त- कुठार, विदारणी और खंडक. अधिकाश हिमयुग इसी युग से गुजरा. इस युग के स्थल विशेषकर सोहननदी की घाटी, पश्चिमी भारत में डीडवाना,चितौडगढ़, नागरी, गुजरात की साबरमती घाटी, मध्यप्रदेश की नर्मदा घाटी में नरसिंहपुर और होशंगाबाद, उतर प्रदेश में सिंगरौली बेसिन, पूर्वी क्षेत्र में कुलियाना और कमारपाड़ा, पश्चिम बगांल की बांकुरा जिले की सिसुनिया पहाड़ी तथा प्रायद्वीप आदि. ये लोग आम तौर पर जलस्त्रोंतो के पास रहते थे,क्योंकि  उनके पास पानी रखने या उसे ले जाने वाले बर्तन नहीं थे. इस युग के मानवीय जीवाश्म नहीं मिलते.
मध्य-पुरापाषाण काल में उद्योग मुख्यतः शल्क से बनी वस्तुओं का था. मुख्य औजार शल्क से बने विविध प्रकार के फलक, वेधनी, छेदनी और खुरचनी. इस युग के स्थल विशेषकर महाराष्ट्र के गोदावरी और उसकी उपधाराओं की घाटियों में पाए गए, इन स्थलों में नेवासा सुरेगांव, बेल पंढारी और नन्दूर मधमेश्वर आदि शामिल है. हाल की खुदाइयों से पश्चिम बंगाल के बांकुरा और पुरूलिया नामक स्थान भी इनसे जुड़ गए है. अग्नि का ज्ञान हो गया था लेकिन मानव प्रकृतिजीवी था.
उच्च पुरापाषाण काल में मौसम की ठंडक बहुत हद तक कम हो चुकी थी. विश्वव्यापी संदर्भ में इसकी दो विलक्षणताएँ – नए चकमक उद्योग की स्थापना और आधुनिक प्रारूप में मानव (होमोसेपियन्स) का उदय. इस युग के महत्वपूर्ण स्थलों में रेनुगुन्टा (आन्ध्र प्रदेश) मुच्छतला चिन्तमनु गवई (आन्ध्र प्रदेश) भीमवेटका, बाघोर (मध्य प्रदेश) तथा बेलन घाटी (इलाहाबाद, उ. प्र). प्रमुख है. इस युग के प्रमुख औजार फलक (रेनुगुन्टा से बरामद) तथा तक्षणी हैं.
इस युग की महत्वपूर्ण घटनाए हैं –
  • नई दुनिया और आस्ट्रेलिया सहित संसार के बसने लायक अधिकतर भागों में मानव का फैलाव,
  • अनेक प्रकार की हड्डियों के बने औजारों (मुच्छतला चिन्तमनु गवई से प्राप्त) ,सुइयों तथा मत्स्य बर्छियों (हार्पुन) का प्रादुर्भाव,
  • सापेक्षतया बडे पैमाने पर और एकाएक कला और अनुष्ठानों को प्रतिबिम्बित करने वाली छोटी मूर्तियों व चित्रकारी का प्रादुर्भाव,
  • मानव समूहों का रक्त सम्बन्धों या बन्धुत्व के रिश्तों में बांध कर उन्हें संगठित करने का ठोस प्रयास.
प्रस्तर युग के बारे में 15 बेहद महत्वपूर्ण तथ्य-Ancient History Notes and Important Facts
  • इतिहास के जिस काल की जानकारी के लिए लिखित साधन का अभाव है तथा मानव असभ्य जीवन जी रहा था उसे प्रागैतिहासिक काल कहा जाता है
  • जिस काल की जानकारी के लिए लिखित साधन तो उपलब्ध हैं परंतु उसे पढ़ा नहीं जा सकता उसे आद्य इतिहास कहा जाता है हडप्पा का इतिहास काल है
  • इतिहास किए जिस काल की जानकारी के स्रोत के रूप में लिखित साधन उपलब्ध हैं उसे ऐतिहासिक काल कहा जाता है
  • मानव का अस्तित्व पृथ्वी पर अति नूतन काल के आरंभ में हुआ था
  • गर्त आवास का साक्ष्य गुफ्फ्कर्ल, बुर्जहोम तथा  नागार्जुनकोंडा से मिला है
  • बेलन घाटी क्षेत्र पुरापाषाण काल के तीनों चरणों से जुड़ा है
  • भीमबेटका से गुफा चित्रकारी के साक्ष्य मिले हैं
  • मध्य प्रदेश के आजमगढ़ तथा राजस्थान के बागोर से पशुपालन के सबसे पुराने साक्ष्य मिले हैं
  • मेहरगढ़ से सर्व प्रथम कृषि का साक्ष्य मिला है
  • नव पाषाण युग के हथियार बिहार के चिरांद नामक स्थान से प्राप्त हुए हैं
  • इलाहाबाद के कोल्डीहवा स्थान से चावल की खेती के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं
  • गर्तचूल्हे का प्राचीन साक्ष्य लंघनाज तथा सराय नाहर राय से मिला है
  • कुपगल तथा काडेकल से राख का टीला मिला है
  • मृदभांड निर्माण का प्राचीनतम साक्ष्य जो चौपानी मांडो से मिला है
  • मनुष्य के साथ पालतू पशु को दफनाने का साक्ष्य बुर्जहोम से मिला है
इस Topic से परीक्षा में आए हुए प्रश्न
  • कैलिग्राफी सुलेखन को कहते हैं.
  • पुरालेख विद्या का मतलब शिलालेख के अध्ययन से लिया जाता है.
  • प्रस्तर युग में कुत्ता एक घरेलू पशु था.
  • पुरा पाषाण काल को मानव अस्तित्व का प्रारंभिक काल माना जाता है.
  • पुरालेखशास्त्र को एपिग्राफी कहते हैं, इसके अंतर्गत शिलालेख का अध्ययन करते हैं.
  • पुरालिपिशास्त्र को पेलियोग्राफी कहते हैं इसके अंतर्गत प्राचीन लिपि का अध्ययन किया जाता है.
  • सुलेखन की कला को कैलिग्राफी कहते हैं. मुहम्मद बिन तुगलक इतिहास में सुदंर हस्तलेख के लिए प्रसिद्ध है.
  • निम्म पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थलों में कश्मीर, बेलन घाटी के अंतर्गत मीरजापुर (Uttar Pradesh), भीमबेटका (Madhya Pradesh).
  • मध्यपुरा पाषाण काल के मुख्य स्थल हैं- मीरजापुर (उत्तर प्रदेश), नेवासा (महाराष्ट्र), ओडिशा.
  • मध्यपुरा पाषाण काल कोFlake Culture भी कहते हैं.
  • सबसे पुरानी चित्रकारी के प्रमाण उच्च पुरा पाषाण काल के दौरान भीमबेटका से मिलते हैं. गुफा शैल चित्रकारी के लिए भीमबेटका मशहूर है.
  • मध्य पाषाण काल में आदमगढ़ और बागोर से पशुपालन के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं.
  • विश्व और भारतीय उप-महाद्वीप में चावल का सबसे प्राचीनतम प्रमाण नव पाषाणकाल (6000 ईसा पूर्व) में कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश) से मिलता है.
  • कृषि का सर्वप्रथम साक्ष्य मेहरमढ़ से मिलता है.
  • सराय नाहर राय से मध्य पाषाणिक काल में पशुपालन के साक्ष्य मिलते हैं.

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