Daily Current Affairs – 22 September 2018 हिन्दी में

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  1. Multidimensional Poverty Index 2018
संदर्भ
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ( United Nations Development Programme – UNDP) तथा ऑक्सफ़ोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (Oxford Poverty and Human Development Initiative – OPHI) ने 2018 का बहु-आयामी दरिद्रता सूचकांक 2018 (Multidimensional Poverty Index – MPI) निर्गत कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि इस सूचकांक में दरिद्रता के कई आयामों को विचार में लाया जाता है. ये आयाम हैं – स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर, साफ़ पानी, सफाई, पर्याप्त पोषण आदि.

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भारत का प्रदर्शन
  • इस सूचकांक के अनुसार भारत में पिछले दस वर्षों में बहुआयामी दरिद्रता की दर 55% से घटकर 28% रह गई है.
  • इन दस वर्षों में 271 मिलियन दरिद्रता के चंगुल से निकल चुके हैं, फिर भी भारत में अभी भी 364 मिलियन दरिद्र लोग हैं और इनमें से लगभग आधे बच्चे हैं.
  • भारत में पिछली 2005-2015 तक दरिद्रता में आई कमी की तुलना चीन में इस दिशा में पिछले 20 वर्षों में प्राप्त की गई उपलब्धि से की जा सकती है.
  • बहु-आयामी दरिद्रता कासबसे बड़ा कारक भारत में कुपोषण है जो कि लगभग हर राज्य में देखा जाता है. दरिद्रता का दूसरा सबसे बड़ा कारक परिवार में ऐसे सदस्य का न होना है जिसने छह वर्षों की पढ़ाई पूरी की हो. साफ़ पानी का अभाव और बाल मृत्यु दर दरिद्रता के अन्य आयाम हैं जिनका दरिद्रता में न्यूनतम योगदान है.
राज्यवार आँकड़ें
  • जहाँ तक राज्यों की बात हैझारखंड ने सबसे अधिक प्रगति की है. उसके बाद जिन राज्यों के नाम आते हैं वे हैं – अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और नागालैंड. ये राज्य झारखंड से थोड़े ही पीछे हैं. फिर भी 2015-16 में बिहार सबसे दरिद्र राज्य था क्योंकि इसकी आधी से अधिक जनसंख्या गरीबी झेल रही है.
  • 2015-16 में देश के दरिद्रतम राज्य – बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश – में 196 मिलियन दरिद्र लोग थे जो पूरे भारतवर्ष के गरीबों की आधी संख्या है. जिन राज्यों में बहु-आयामी दरिद्रता सबसे कम है, वे हैं – दिल्ली, केरल और गोवा.
भारत का तुलनात्मक प्रदर्शन
  • दक्षिण एशिया में नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान और अफ़ग़ानिस्तान में भारत की तुलना मेंबहु-आयामी दरिद्रता के मामले अधिक हैं. केवल मालदीव (007 MPI) में भारत (0.121) से बेहतर स्थिति है.
  • भारत (364 मिलियन) के बाद जिन देशों में बहु-आयामी दरिद्रता से ग्रस्त बड़ी आबादी है, वे हैं – नाइजीरिया (97 मिलियन), इथियोपिया (86 मिलियन), पाकिस्तान (85 मिलियन) और बांग्लादेश (67 मिलियन).
वैश्विक प्रदर्शन
  • दरिद्रता सूचकांक में 105 देशों पर विचार किया गया है. इन देशों में विश्व की 75% (5.7 बिलियन) जनसंख्या है. जिनमें 3 बिलियन लोग बहु-आयामी दरिद्रता से पीड़ित हैं और उनमें आधे लोग 18 वर्ष से कम की आयु के हैं.
  • विश्व के 83% निर्धन लोग दक्षिण एशिया और अफ्रीका में रहते हैं.
  • सूचकांक से पता चलता है कि बहु-आयामी दरिद्र (1 बिलियन) गाँवों में रहते हैं जहाँ निर्धनता की दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में चौगुनी है.
  1. CARA- Central Adoption Resource Authority
संदर्भ
केन्द्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने लिव-इन सम्बन्ध में रहने वाले व्यक्तियों को भारत से और भारत में बच्चों को दत्तक के रूप में लेने की अनुमति दे दी है. ज्ञातव्य है कि पहले CARA ने live-in में रहने वाले व्यक्तियों को दत्तक ग्रहण से मना कर दिया था क्योंकि इसके अनुसार बच्चा उसी परिवार में गोद लिया जा सकता है जो एक स्थायी परिवार हो जबकि लिव-इन परिवार एक स्थायी परिवार नहीं होता है.

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गोद लेने की शर्तें
2017 के दत्तक ग्रहण विनियमों के अनुसार यदि कोई विवादित जोड़ा बच्चा गोद लेना चाहता है तो उनका वैवाहिक जीवन कम से कम 2 वर्ष स्थिर रखना आवश्यक है. आवेदकों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से स्थिर होना चाहिए क्योंकि उन्हें एक बच्चे का लालन-पालन करना है. जहाँ तक अकेली स्त्री अथवा अकेले पुरुष की बात है तो नियम यह है कि अकेली स्त्री बच्चा या बच्ची किसी को भी गोद ले सकती है जबकि अकेला पुरुष केवल बच्चे को ही गोद ले सकता है.
CARA क्या है?
  • केन्द्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एकवैधानिक निकाय है.
  • CARA देशंतारीय दत्तक ग्रहण विषयक 1993 कीहेग संधि, जिसे भारत ने 2003 में अंगीकृत किया था, में CARA को ऐसे मामलों के लिए केन्द्रीय प्राधिकरण घोषित किया गया था.
  • CARA कामुख्य कार्य अनाथ, त्यक्त और समर्पित किये गये बच्चों के दत्तकग्रहण को विनियमित है.
  • हेग संधि (Hague Convention) का कार्य बच्चों और उनके परिवारों को विदेश में अवैध, अनियमित, समय-पूर्व अथवा अविचारित दत्तक ग्रहण से रक्षा करना है.
  • हाल ही में अवैध दत्तकग्रहण के बढ़ते मामलों को देखते हुएमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश दिया था कि एक महीने के अन्दर वे सभी बाल देखभाल संस्थानों को पंजीकृत करें और उन्हें CARA से जोड़ दें.
  • ज्ञातव्य है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 में यह प्रावधान है कि बाल देखभाल की सभी संस्थाएँ पंजीकृत की जाएँ और उन्हें CARA से जोड़ दिया जाए.
  1. NASA balloon mission
संदर्भ
NASA ने गुब्बारा अभियान (balloon mission) के दौरान खींचे गये छायाचित्रों का विश्लेषण करना आरम्भ कर दिया है.
  • ज्ञातव्य है कि इस अभियान के तहत हाल ही में रात में चमकने वाले बादलों (noctilucent clouds) अथवा ध्रुवीय मध्य-वायुमंडलीय बादलों (polar mesospheric clouds – PMCs) के चित्र खींचे थे. इन चित्रों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को वायुमंडल तथा समुद्रों, झीलों और अन्य ग्रहीय वायुमंडलों के क्षोभ को अधिक अच्छे से समझने में सहायता मिलेगी.
गुब्बारा अभियान क्या है?
जुलाई 28 को NASA में टर्बो अभियान में एक विशाल गुब्बारा छोड़ा था जो धरातल से 50 मील ऊपर स्थापित किया गया था. यह गुब्बारा पाँच दिनों तक समताप मंडल में स्वीडेन के Esrange से लेकर कनाडा के Western Nunavut तक आर्कटिक के ऊपर उड़ता रहा. इस दौरान गुब्बारे के ऊपर रखे कैमरों ने 60 लाख अत्यंत साफ़ (high resolution) चित्र खींचे इनसे वायुमंडलीय क्षोभ की प्रक्रिया का पता चलता है.
ध्रुवीय मध्य-वायुमंडलीय बादल (PMCs) क्या हैं?
ध्रुवीय मध्य-वायुमंडलीय बादल (PMCs) गर्मियों में ध्रुवों के 50 मील ऊपर बनते हैं. ये बहुत करके हिमकणों के बने होते हैं और आकाश में फीकी रेखाओं के समान दिखते हैं. ये बादल सायंकाल में तभी दिखाई पड़ते हैं जब सूरज के किरणों के कारण इनका रंग तेज इलेक्ट्रिक नीला अथवा उजला हो जाता है.
ये बादल वायुमंडलीय गुरुत्व लहरों से प्रभावित होते हैं, जो वायु के संवहन के कारण एवं वायु के ऊपर उठने के कारण बनती हैं. वायु के ऊपर उठने का कारण कभी-कभी पर्वतीय शृंखलाएँ भी होती हैं. ये लहरें निचले वायुमंडल की ऊर्जा को मध्य वायुमंडल तक ले जाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
Source: Times of India
  1. Transiting Exoplanet Survey Satellite
संदर्भ
NASA के Transiting Exoplanet Survey Satellite (TESS) ने हाल ही में सौर मंडलों में “सुपर अर्थ (Super earth)” और हॉट अर्थ (Hot earth)” ग्रहों की खोज की है. अप्रैल में हुए इसके प्रक्षेपण के पश्चात् यह TESS की पहली खोज है.
  • इनमें से Super Earth अर्थात्Pi Mensae c धरती से 60 प्रकाश वर्ष दूर है और यह अपने सूर्य की परिक्रमा 3 दिनों में पूरी कर लेता है.
  • Hot Earth अर्थात्LHS 3844 b धरती से 49 प्रकाश वर्ष दूर है और यह अपने सूर्य की परिक्रमा 11 घंटों में पूरी कर लेता है.
TESS
  • TESS का full form है – Transiting Exoplanet Survey Satellite.
  • यह सौर प्रणाली के बाहर उपग्रहों की खोज के लिए एक नया मिशन है.
  • विदित हो कि इसी उद्देश्य से पूर्व में भेजे गए Kepler mission का जीवनकाल समाप्त होने जा रहा है. यह मिशन उसी का स्थान ले रहा है.
  • TESS mission का प्रारम्भ सौरमंडल के पड़ोस में स्थितछोटे ग्रहों का पता लगाने के लिए 18 April 2018 को किया गया.
  • जब कोई उपग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो उस घटना को संक्रमण (transit) कहा जाता है. उस समय उस तारे की चमक में रुक-रुक कर और नियमित रूप से कमी आ जाती है. यह यान इस घटना का अध्ययन करेगा. इसके लिए यह कम से कम 2 लाख तारों पर नजर रखेगा.
  • यह जिन तारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगा वे केपलर द्वारा परीक्षित तारों की तुलना में 30 से 100 गुने अधिक चमकीले हैं.
  • यह यान पृथ्वी और चन्द्रमा के परिक्रमा पथ पर रहकर समस्त आकाश का सर्वेक्षण करेगा.
खोज अभियान का महत्त्व
NASA को आशा है कि TESS के माध्यम से हजारों नए ग्रहों का पता चलेगा. इनमें से अधिकांश ग्रह चट्टानी सतह अथवा समुद्र वाले हो सकते हैं, अतः यह माना जा सकता है कि इनमें जीवन का विकास हुआ हो.
Source: The Hindu
  1. Hayabusa 2

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संदर्भ
जापान द्वारा भेजे गये खोजी अन्तरिक्ष यान Hayabusa 2 ने Ryugu नामक अंडाकार क्षुद्रग्रह की ओर दो अन्वेषक रोबोट भेजे हैं जिससे कि उस क्षुद्र ग्रह से खनिज के नमूने प्राप्त किये जा सकें. इन नमूनों से सौर मंडल की उत्पत्ति के विषय में जानकारी मिल सकती है.
  • यदि यह अभियान सफल होता है तो यह इतिहास में पहली बार होगा कि किसी खोजी अन्तरिक्ष यान ने किसी क्षुद्रग्रह की सतह को रोबोट के माध्यम से निरीक्षण किया हो.
  • इस क्षुद्रग्रह में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है. इस बात का लाभ उठाकर यह रोबोट उसकी सतह पर 15-15 मीटर उछल सकते हैं और साथ ही हवा में 15 मिनट तक ठहर सकते हैं. इस प्रकार ये अपने कैमरों और सेंसरों के माध्यम से क्षुद्रग्रह की भौतिक विशेषताओं का सर्वेक्षण कर सकते हैं.
Hayabusa 2 क्या है?
  • Hayabusa 2 एक जापानी खोजी यान है जिसमें आदमी नहीं होता है. यह 2014 में जापान केTanegashima Space Centre से H-IIA rocket से छोड़ा गया था. यह छह वर्ष तक काम करेगा और Ryugu क्षुद्रग्रह से खनिज नमूने लाएगा.
  • Hayabusa 2 फ्रांस और जर्मनी का एक भूमि पर उतरने वाला वाहन भी छोड़ेगा जिसका नाम MASCOT (Mobile Asteroid Surface Scout) है.
  • इस खोजी यान का आकार एक बड़े फ्रिज इतना है. इसमें सौर पैनल लगे हुए हैं.
  • विदित हो कि Hayabusa 1 पहला ऐसा खोजी यान था जो क्षुद्रग्रह की खोज करने के लिए प्रक्षेपित हुआ था. Hayabusaजापानी भाषा में बाज को कहते हैं. Hayabusa 2 इसी का उत्तराधिकारी है.
  • यदि सबकुछ ठीक रहा तो Hayabusa 2 2020 तकपृथ्वी पर मिट्टी के नमूने लेकर लौट आएगा.
 Source: The Hindu
  1. RemoveDEBRIS
संदर्भ
RemoveDebris प्रणाली ने हाल ही में सफलतापूर्वक अन्तरिक्षीय मलबा पकड़ने का परीक्षण पूरा कर लिया है.
RemoveDebris 
  • RemoveDebris नाम की यह परियोजनायूरोपियन यूनियन द्वारा चलाई जा रही है.
  • इस परियोजना का उद्देश्य अन्तरिक्ष मलबे को निबटाने से सम्बंधित तकनीकों का परीक्षण करना है जिससे कि आगे चलकर अन्तरिक्ष को ऐसे मलबों से कुशलतापूर्वक मुक्त किया जा सके.
  • योजना के अंतर्गत RemoveSAT नामक एक अति-लघु उपग्रह छोड़ा जायेगा जो अन्तरिक्ष में जाकर वहाँ के मलबों को पकड़ेगा और परिक्रमा पथ से अलग कर देगा.
  • विदित हो कि अन्तरिक्षीय मलबा की समस्या बढ़ती ही जा रही है और आज की तिथि में हमारी पृथ्वी के परिक्रमा-पथ में 7,500 टन फ़ालतू हार्डवेयर घूम रहा है.
  • ये फ़ालतू हार्डवेयर हैं – पुराने राकेट, निष्क्रीय अंतरिक्षयान, पेंचें, पेंट के चकत्ते आदि.
कुछ विशेष महत्वपूर्ण तथ्य
Dickinsonia :-
  • Dickinsonia उस प्राणी का नाम है जिसे भूवैज्ञानिक रेकॉर्ड (geological record) वाला सबसे पुराना प्राणी माना जाता है.
  • यह एक विचित्र अंडाकार जीव है जिसमें पूरे शरीर में पंजरों जैसी आकृतियाँ हैं.
  • यह प्राणी पृथ्वी पर 55 करोड़ 80 लाख वर्ष पहले रहा करता था.
  • हाल ही में इसके जीवाश्मों का पता उत्तर-पश्चिम रूस में White Sea के पास चला है.
India contributes $1 mn to UN solar project :-
  • न्यू यॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के विशाल भवन की छत पर सौर पैनल लगाने के लिए भारत ने 10 लाख डॉलर का योगदान किया है.
  • इससे कार्बन फुटप्रिंट को घटाने और सतत ऊर्जा को बढ़ाने में मदद मिलेगी.
  • स्मरणीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres नेclimate action के लिए आह्वान किया था.

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