Revolt of 1857 {*1857 का विद्रोह**} Causes and Effects Notes PDF for UPSC

Causes of revolt of 1857 | 1857 Revolt Notes UPSC

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Short Notes on Revolt of 1857 (1857 का विद्रोह)  PDF for UPSC Download करें– आज SarkariNaukriHelp आप सब छात्रों के लिए भारतीय इतिहास(Ancient History Notes से सम्बंधित महत्वपूर्ण Short Note on Revolt of 1857 शेयर कर रहा है.इस 1857 Revolt Notes UPSC  में 1857 के विद्रोह के बारे में महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्यों का संग्रह है जो कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी हैं, चाहे कोई  भी Competitive Exam हो, हमेशा ही इस टापिक  से प्रश्न पूछे जाते हैं, और ख़ास तौर पर UPSC, UPPSC, SSC, Railway आदि Competitive Exams में तो Questions on Revolt of 1857  की भरमार होती है, इस 1857 Revolt Notes PDF UPSC में  जिस तरह से समझाया गया है वह बहुत ही आसान है और आप बड़ी आसानी से इन प्रश्नों और Topics को याद रख सकते हैं.

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1857 का विद्रोह – Short Note on Revolt of 1857

  • 1857 का विद्रोह कम्पनी के अधीनस्थ भारतीय सैनिकों की बगावत से प्रारम्भ हुआ1857 का विद्रोह का प्रारम्भ
  • 1857 का विद्रोह कम्पनी के अधीनस्थ भारतीय सैनिकों की बगावत से प्रारम्भ हुआ1857 का विद्रोह का प्रारम्भ

बॉथ की हत्या

  • इन्हीं में एक सैनिक मंगल पांडे थे जिन्होंने इसी बात पर अपने ऑफिसर बॉथ की हत्या कर दी और यहींं से 1857 का विद्रोह शुरु हो गया
  • मंगल पांडे को बाद में पकड लिया गया और 19 वीं और 34 वीं इंफेंटरी बंद कर दी गई व मंगल पांडे पर मुकदमा चला के उसे फाँसी दे दी गई
  • इसके बाद 10 मई 1857 को मेरठ से यह प्रारंभ होकर 11 मई को विद्रोही सैनिक दिल्ली पहुँचे और वहाँ पर जो अपदस्थ मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर था उसे इन्होंने अपना नेता घोषित कर दिया वास्तविक सैनिक नेतृत्व जनरल बख्त खाँ के हाथों था
  • अवध में बेगम हजरत महल ने विद्रोहीयों का नेतृत्व संभाला और उसके पुत्र विजरिस कादिर को वहाँ का शासक घोषित कर दिया

21 सितम्बर 1857 पर दिल्ली पर कब्जा

अंग्रेजों ने पंजाब से सेना बुला के 21 सितम्बर 1857पर दिल्ली पर कब्जा कर लिया और लेफ्टिनेंट हडसन ने धोखे से बहादुर शाह द्वितीय ने बहादुर शाह जफर के दो पुत्रों और एक पोते को गोली मार दी

विद्रोहियों का नेतृत्व

  • कानपुर ने तात्या टोपे और नाना साहेब ने विद्रोहियों का नेतृत्व किया तात्या टोपे को सिधिंया के एक सामंत मानसिंह ने धोखे से पकडवा दिया गया 1859 में इन्हें फाँसी दे दी गई
  • नाना साहब हजरत महल और खान बहादुर खाँ यह नेपाल भाग गये

जनरल जफर खाँ की मृत्यु

  • जनरल जफर खाँ जो बहादुर शाह की सेना का नेतृत्व कर रहे थे वो भी 1859 में लडते हुए शहीद हो गए
  • जुलाई 1858 तक विद्रोह को बिल्कुल दबा दिया गया

विद्रोह का नेतृत्व तथा दमन

  • दिल्ली से बहादुर शाह जफर और बक्त खाँ इसका नेतृत्व कर रहे थे तथा निकलसन और हटसन इसका दमन कर रहे थे
  • कानपुर से नाना साहेब नेतृत्व कर रहे थे तथा कोलिन कैम्पेन इसका दमन कर रहे थे
  • जगदीशपुर बिहार से कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह नेतृत्व कर रहे थे और मेजर विलियम टेलर दमन करने वाले थे
  • झाँसी से रानी लक्ष्मी बाई और ग्वालियर से तात्या टोपे तथा फ्यूरोज दमन करने वाले थे
  • लखनऊ से बेगम हजरत महल और बिजरिस कादिर तथा दमन करने वाले अधिकारी कोलिन कैम्पेल और हेनरी लॉयंस
  • इलाहबाद से लियाकत अली और दमन करने वाले अधिकारी कर्नल ली
  • फैजाबाद से मौलवी अब्दुल्ला और दमन करने वाले अधिकारी सर रिनॉर्ड
  • बरेली से खान बहादुर और दमन करने वाले अधिकारी सर आयर

1857 के विद्रोह के कारण –  Causes of revolt of 1857

राजनैतिक कारण

डलहौजी की राज्य हडप ने की नीति , भारतीयो के साथ अंग्रेजों का घृणित व्यवहार (रंगभेद करना अच्छा व्यवहार ना करना उच्च पदों पर केवल अंग्रेजों को ही आसीन किया जाता था और भारतीयोंको छोटे पदों पर आसीन किया जाता था )

आर्थिक कारण

अंग्रेजों की नीति की वजह से उद्योग धंधे भी बंद हो गये इससे बहुत लोग बेरोजगार व निर्धन हो गये उनकी कृषक योजनाएं भी सफल नहीं हो पायी

सामाजिक कारण

सामाजिक वजह जाति थी वे जातियों की अवहेलना करते थे सती प्रथा पर भी प्रतिबंध लगा दिया डाक तार चलाया रेल चलाई ये सब कार्य किया तो लोगों को लगा कि अंग्रेज इन सब के माध्यम से ईसाई धर्म का प्रचार करना चाहते है

धार्मिक कारण

 वे हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मो की आलोचना करते थे उन्होंने ने गोद प्रथा को भी बंद करा दिया

तत्कालिक कारण

सूअर की चर्बी का बना कारतूस को मुँह से चबाना पडता था और हिंदू और मुस्लिम दोनो सैनिकों ने ही उसे मुँह से चबाने को मना कर दिया था

विद्रोह की असफलता के अन्य कारण

  • यह विद्रोह स्थानीय व असंगठित था
  • इसमें राष्ट्रीय भावना का आभाव था
  • विद्रोहियों को सभी वर्गो का सहयोग नहीं मिला था क्योकि शिक्षित व मध्यम वर्ग उदासीन था
  • बेहतरीन नेतृत्व की क्षमता का आभाव था
  • बम्बई, मद्रास, ग्वालियर, हैदराबाद, इंदौर, अहमदाबाद, जोधपुर, पटियला, कश्मीर, नामा, जिंद और नेपाल के शासको ने विद्रोह को दबाने मे अंग्रेजो का साथ दिया

विद्रोह के परिणाम

  • 1858 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त हो गया और भारत पर शासन का अधिकार महारानी के हाथों में आ गया
  • इग्लैड में भारत राज्य सचिव की नियुक्ति हुई भार्त में गवर्नर जनरल का पद समाप्त करके वायसराय का पद बनाया गया जो कि क्राउन का प्रतिनिधि होता है
  • हिन्दू मुस्लिम एकता की भावना का विकास हुआ और भारतीयऔर यूरोपीय सैनिको का अनुपात 2:1 का था और तोपखाने पर पूर्णत: यूरोपीय सैनिको का ही अधिकार था

1857 के बाद हुए नागरिक विद्रोह

  • 1857 के विद्रोह के बाद भारत में और भी अनेक विद्रोह हुए जिनमें कुछ नागरिक विद्रोह थे कुछ आदिवासी तथा कुछ कृषक विद्रोह थे

सन्यासी विद्रोह (Sanyasi Vidroh)

  •  यह 1763 ई. से 1800 ई. तक चला अंग्रेजो के द्वारा बंगाल के आर्थिक शोषण से जमींदार ,शिल्पकार, कृषक सभी नष्ट हो गये थे 1770 में यहाँ भीषण अकाल पडा और तीर्थ स्थानों पर जो आने जाने पर जो प्रतिबंधो से त्रस्त हो कर सन्यासियों ने विद्रोह कर दिया

चुआर विद्रोह(Chuar Vidroh)

  • यह 1767 से 1772 तक तथा 1795 से 1816 तक दो कालो में हुआ अकाल और बढे हुए भूमि कर अन्य आर्थिक संकटों के कारण मिदनापुर जिले की एक आदिम जाति थी जो चुआर कहलाती थी उन लोगोने हथियार उठा लिए

कच्छ का विद्रोह(kacch ka vidroh)

  • 1819 में कच्छ के राजा भारमल को अंग्रेजो ने हठा के वहाँ का वास्तविक शासन एक अंग्रेज रेजीडेंट के अधीन प्रतिशासक परिषद को दे दिया इस परिषद द्वारा किये गये परिवर्तनों और अत्याधिक भूमि कर लगाने के कारण लोगों ने विद्रोह कर दिया और यहाँ 1831 में विद्रोह हो गया

बघेरा विद्रोह(Baghera Vidroh)

  • यह बडौदा के गायकबाड ने अंग्रेजी सेना की सहायता लेकर लोगों से अधिक कर प्राप्त करने का प्रयास किया तो बघेरा सरदार ने 1818 और 1819 के बीच विद्रोह कर दिया

 सूरत का नमक आंदोलन (Surat Aandolan)

  • 1844 में सूरत में नमक कर आधा रुपया प्रति मन कर दिया गया 1848में सरकार ने एकमात्र नाप तौल लागू करने का भी निश्च्य किया लोगो ने बढे हुए नमक कर का दृढता पूर्वक बहिष्कार किया और अंत में सरकार को अपना फैसला वापस लेना पडा

रमौसी विद्रोह(Ramousi Vidroh)

  • पश्चिमी घाट के निवासी रमौसी जाति के लोगों ने अंग्रेजी शासन पध्दति से अप्रसन्न हो कर 1822,25,26 और 1829में विद्रोह कर दिया और सतारा के आस-पास के क्षेत्र को लूट लिया

कोलाहपुर तथा सामंतवाडी विद्रोह(Kolhapur Aur Samantvaadi)

  • 1844 ई. में कोलाहपुर राज्य के प्रशासनिक पुर्न:गठन होने के कारण काडकारी सैनिकों की छटनी कर दी गई
  • बेगारी का प्रश्न सम्मुख रख काडकारियों ने विद्रोह कर दिया इस प्रकार सामंतबाडियों ने भी मोपला विद्रोह कर दिया
  • मोपला विद्रोह ग्रामीणवाद के आतंकवाद के विशिष्ट प्रकार थे जो उन मोपालों के हित में जैनियों की बढी हुई शक्ति को सीमित करने का सबसे प्रभावशाली साधन थे
  • 1836 से 1854 के बीच हुए 22 विद्रोहों ने जैनियों की सम्पति पर आक्रमण और उनके मन्दिरों को नष्ट कर दिया यह विद्रोही गरीब किसान व भूमिहीन श्रमिक होते थे
  • 1921 में अली मुसालियार के नेतृत्व में पुन: मोपला विद्रोह की चिंगारी उठी इस बार खिलाफत आंदोलनकारी और कास्तकार सम्मिलित रुप से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने पर उतारु हो गये
  • विद्रोहियों ने कचहरी, थाना, खजाना अन्य सरकारी कार्यालयों विदेशी बगान मालिकों को अपना निशाना बनाया परंतु अंग्रेजी दमन चक्र के कारण 1921 के आते आते विद्रोह पूरी तरह कुचल दिया गया

पागलपंती विद्रोह (Pagalpanthi Vidroh)

  • यह 1840 और 1850में हुआ था ये अधार्मिक सम्प्रदाय था जिसे उत्तर बंगाल के कर्मशाह और उसके पुत्र टीपू मे आगे बढाया ये राजनितिक व धार्मिक प्रभावों से प्रभावित थे

फरैजी विद्रोह (Faraiji Vidroh)

  • यह 1838से 1857 तक हुआ फरैजी लोग सामाजिक,धार्मिक तथा राजनैतिक परिवर्तनों के प्रतिपादक थे तथा शरीयत उल्ला द्वारा चलाये गये सम्प्रदाय के अनुयायी थे
  • शरीयत उल्ला के पुत्र दादू मिया ने बंगाल से अंग्रेजो को निकालने की योजना बनायी ये विद्रोह जमींदारों के अत्याचारों के चलते 1838 से 1857 तक चलता रहा

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